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9.86.40
उन्मध्व॑ ऊ॒र्मिर्व॒नना॑ अतिष्ठिपद॒पो वसा॑नो महि॒षो वि गा॑हते । राजा॑ प॒वित्र॑रथो॒ वाज॒मारु॑हत्स॒हस्र॑भृष्टिर्जयति॒ श्रवो॑ बृ॒हत् ॥ (४०)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.86.40 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
मधुर सोम का रस स्तुतियों को उन्नत करता है. महान् सोम जल को ढकते हुए कलश में जाते हैं. दशापवित्र राजा सोम का रथ है. अपरिमित गमन वाले सोम युद्ध में जाते हैं एवं हमारे लिए बहुत सा अन्न जीतते हैं. (४०)
EN English Translation
The juice of the sweet mon upgrades the praises. The Great Som goes to the kalash covering the water. Dashapavitra is the chariot of King Som. The unmitigated mons go to war and win a lot of food for us. (40)