Popular:
ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 86 • Mantra / Rik 45

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 86 • ऋचा / मन्त्र 45

9.86.45

Mantra ID: 9.86.45

अ॒ग्रे॒गो राजाप्य॑स्तविष्यते वि॒मानो॒ अह्नां॒ भुव॑ने॒ष्वर्पि॑तः । हरि॑र्घृ॒तस्नुः॑ सु॒दृशी॑को अर्ण॒वो ज्यो॒तीर॑थः पवते रा॒य ओ॒क्यः॑ ॥ (४५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 9.86.45 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

आगे चलने वाले, सुशोभित व जल में शुद्ध किए गए सोम की स्तुति की जाती है. दिनों का निर्माण करने वाले, जलों में स्थित, हरे रंग वाले, जल उत्पन्न करने वाले, सुंदर, जल से युक्त एवं ज्योतिपूर्ण रथ वाले सोम घर देते हैं. (४५)

EN English Translation

The forward-going, beautified and purified mon in water is praised. The soms who build the days, are located in the waters, green in colour, water-producing, beautiful, water-rich and light-filled chariots give houses. (45)

卐 HinduText AI