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9.86.47
प्र ते॒ धारा॒ अत्यण्वा॑नि मे॒ष्यः॑ पुना॒नस्य॑ सं॒यतो॑ यन्ति॒ रंह॑यः । यद्गोभि॑रिन्दो च॒म्वोः॑ सम॒ज्यस॒ आ सु॑वा॒नः सो॑म क॒लशे॑षु सीदसि ॥ (४७)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.86.47 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे सोम! छनते समय तुम्हारी चंचल धाराएं भेड़ के बालों से बने दशापवित्र को पार करके जाती हैं. जब तुम चमू नामक पात्रों के ऊपर जलों के साथ मिलाए जाते हो, उस समय बुम निचोड़ते हुए कलशीं में स्थित होते हो. (४७)
EN English Translation
Hey Mon! While sorting, your playful streams cross the dasapavittra made of sheep's hair. When you are mixed with water on top of the characters called Chamu, the booms are located in the kalash, squeezing. (47)