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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 89 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 89 • ऋचा / मन्त्र 3

9.89.3

Mantra ID: 9.89.3

सिं॒हं न॑सन्त॒ मध्वो॑ अ॒यासं॒ हरि॑मरु॒षं दि॒वो अ॒स्य पति॑म् । शूरो॑ यु॒त्सु प्र॑थ॒मः पृ॑च्छते॒ गा अस्य॒ चक्ष॑सा॒ परि॑ पात्यु॒क्षा ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.89.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यजमान शत्रुनाशक, जलप्रेरक, हरे रंग वाले और द्युलोक के पालक सोम को व्याप्त करते हैं. युद्धों में शूर एवं देवों में प्रमुख सोम पणियों द्वारा चुराई हुई गायों वाले स्थान का मार्ग पूछते हैं. इंद्र सोम की सहायता से ही विश्व का पालन करते हैं. (३)

EN English Translation

Hosts permeate the enemy-destroyer, water-inducing, green-coloured and spinach of Dulok. In wars, the chief som among the Shurs and Devas asks for the path of the place of cows stolen by the pangs. Only with the help of Indra Som follow the world. (3)

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