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9.90.5
मत्सि॑ सोम॒ वरु॑णं॒ मत्सि॑ मि॒त्रं मत्सीन्द्र॑मिन्दो पवमान॒ विष्णु॑म् । मत्सि॒ शर्धो॒ मारु॑तं॒ मत्सि॑ दे॒वान्मत्सि॑ म॒हामिन्द्र॑मिन्दो॒ मदा॑य ॥ (५)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.90.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे दीप्तिशाली एवं शुद्ध होते हुए सोम! तुम वरुण, मित्र, विष्णु, शक्तिशाली मरुत्, इंद्र एवं अन्य देवों को नशे के द्वारा तृप्त करो. (५)
EN English Translation
O glorious and pure Mon! You satisfy Varuna, mitra, Vishnu, the mighty desert, Indra and other gods by intoxication. (5)