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9.97.12
अ॒भि प्रि॒याणि॑ पवते पुना॒नो दे॒वो दे॒वान्स्वेन॒ रसे॑न पृ॒ञ्चन् । इन्दु॒र्धर्मा॑ण्यृतु॒था वसा॑नो॒ दश॒ क्षिपो॑ अव्यत॒ सानो॒ अव्ये॑ ॥ (१२)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.97.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
प्रसन्न करने वाले एवं धारण करने वाले तेजों को समय-समय पर ढकते हुए, क्रीड़ाशील एवं अपने रस से देवों की अर्चना करते हुए पवमान सोम टपकते हैं. दस उंगलियां भेड़ के बालों से बने और ऊंचे दशापवित्र पर सोम को भेजती हैं. (१२)
EN English Translation
The pavaman som drips from time to time, covering the radiances that please and hold the radiances, playing and worshipping the gods with their juices. Ten fingers are made of sheep's hair and send it to Mon on the high dashapavitra. (12)