Rigveda Quick Jump
Navigate to any Mandal or Mantra / Rik
9.97.14
र॒साय्यः॒ पय॑सा॒ पिन्व॑मान ई॒रय॑न्नेषि॒ मधु॑मन्तमं॒शुम् । पव॑मानः संत॒निमे॑षि कृ॒ण्वन्निन्द्रा॑य सोम परिषि॒च्यमा॑नः ॥ (१४)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 9.97.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे स्वाद लेने योग्य, दूध से मिले हुए, निचुड़ने वाले एवं शब्दकर्ता सोम! तुम मधुर रस को पाते हो. हे जल से भीगे हुए एवं शुद्ध सोम! तुम अपनी धारा को विस्तृत बनाते हुए इंद्र के लिए जाते हो. (१४)
EN English Translation
O tasteable, milky, squeezing and wordy mon! You find sweet juices. O Soma, drenched in water and pure! You go for Indra, broadening your stream. (14)