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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 97 • Mantra / Rik 40

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 97 • ऋचा / मन्त्र 40

9.97.40

Mantra ID: 9.97.40

अक्रा॑न्समु॒द्रः प्र॑थ॒मे विध॑र्मञ्ज॒नय॑न्प्र॒जा भुव॑नस्य॒ राजा॑ । वृषा॑ प॒वित्रे॒ अधि॒ सानो॒ अव्ये॑ बृ॒हत्सोमो॑ वावृधे सुवा॒न इन्दुः॑ ॥ (४०)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.97.40 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जल बरसाने वाले एवं राजा सोम विस्तृत एवं जलधारक अंतरिक्ष में प्रजाओं को उत्पन्न करते हुए सबसे आगे निकल जाते हैं. अभिलाषापूरक, निचुड़ते हुए एवं दीप्त सोम भेड़ के बालों से बने ऊंचे दशापवित्र पर बहुत बढ़ते हैं. (४०)

EN English Translation

The water-drivers and King Som go to the forefront, producing the people in the vast and water-holding space. The desireful, dull and bright mon grows greatly on the high dasapavittra made of sheep's hair. (40)

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