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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 97 • Mantra / Rik 43

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 97 • ऋचा / मन्त्र 43

9.97.43

Mantra ID: 9.97.43

ऋ॒जुः प॑वस्व वृजि॒नस्य॑ ह॒न्तापामी॑वां॒ बाध॑मानो॒ मृध॑श्च । अ॒भि॒श्री॒णन्पयः॒ पय॑सा॒भि गोना॒मिन्द्र॑स्य॒ त्वं तव॑ व॒यं सखा॑यः ॥ (४३)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.97.43 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सरल गति वाले, उपद्रव नष्ट करने वाले, रोगरूपी राक्षस को बाधा पहुंचाने वाले एवं हमारे हिंसक शत्रुओं को समाप्त करने वाले सोम! तुम टपको. तुम अपने रस को गायों के दूध में मिलाते हुए हमारे और इंद्र के मित्र बनो. (४३)

EN English Translation

O mon of simple speed, destroyer of nuisance, obstructing the diseased monster and putting an end to our violent enemies! You tap. You become friends with us and Indra by mixing your juice in the milk of cows. (43)

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