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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 97 • Mantra / Rik 45

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 97 • ऋचा / मन्त्र 45

9.97.45

Mantra ID: 9.97.45

सोमः॑ सु॒तो धार॒यात्यो॒ न हित्वा॒ सिन्धु॒र्न नि॒म्नम॒भि वा॒ज्य॑क्षाः । आ योनिं॒ वन्य॑मसदत्पुना॒नः समिन्दु॒र्गोभि॑रसर॒त्सम॒द्भिः ॥ (४५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.97.45 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

निचुड़े हुए सोम अपनी धारा के द्वारा तीव्रगामी अश्व के समान जाकर रहने वाली नदी की तरह नीचे ट्रोणकलश में गिरते हैं. शुद्ध सोम द्रोणकलश में बैठते हैं एवं गाय के दूध आदि में मिलाए जाते हैं. (४५)

EN English Translation

The stagnant somas, by their stream, like a fast-moving horse, fall down into the tronkalush like a living river. Pure som sits in dronakalash and is mixed with cow's milk etc. (45)

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