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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 97 • Mantra / Rik 51

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 97 • ऋचा / मन्त्र 51

9.97.51

Mantra ID: 9.97.51

अ॒भी नो॑ अर्ष दि॒व्या वसू॑न्य॒भि विश्वा॒ पार्थि॑वा पू॒यमा॑नः । अ॒भि येन॒ द्रवि॑णम॒श्नवा॑मा॒भ्या॑र्षे॒यं ज॑मदग्नि॒वन्नः॑ ॥ (५१)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.97.51 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे दशापवित्र द्वारा शुद्ध होते हुए सोम! तुम हमें दिव्य एवं पार्थिव सभी प्रकार के धन दो. हम तुम्हारे द्वारा दी हुई शक्ति से धन का उपभोग करें. हम जमदग्नि ऋषि के समान धन पाने में समर्थ हों. (५१)

EN English Translation

O Mon, being purified by Dashapavittra! You give us all kinds of divine and earthly wealth. We consume money from the power you have given us. May we be able to get the same wealth as the sage Jamadagni. (51)

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