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9.97.55
सं त्री प॒वित्रा॒ वित॑तान्ये॒ष्यन्वेकं॑ धावसि पू॒यमा॑नः । असि॒ भगो॒ असि॑ दा॒त्रस्य॑ दा॒तासि॑ म॒घवा॑ म॒घव॑द्भ्य इन्दो ॥ (५५)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.97.55 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे सोम! तुम तीन विस्तृत पवित्रों को भली प्रकार प्राप्त करते हो. तुम शुद्ध होते हुए भेड़ के बालों से बने दशापवित्र की ओर दौड़ते हो. हे सोम! तुम भोगयोग्य, देने योग्य धन के दाता एवं धनवानों की अपेक्षा अधिक धनी हो. (५५)
EN English Translation
Hey Mon! You receive the three elaborate holy ones well. You run towards the dashapavitra made of sheep's hair, being cleansed. Hey Mon! You are more wealthy than the consumable, the giver of the giver and the rich. (55)