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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 97 • Mantra / Rik 57

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 97 • ऋचा / मन्त्र 57

9.97.57

Mantra ID: 9.97.57

इन्दुं॑ रिहन्ति महि॒षा अद॑ब्धाः प॒दे रे॑भन्ति क॒वयो॒ न गृध्राः॑ । हि॒न्वन्ति॒ धीरा॑ द॒शभिः॒ क्षिपा॑भिः॒ सम॑ञ्जते रू॒पम॒पां रसे॑न ॥ (५७)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.97.57 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

महान्‌ एवं अहिंसित देव सोम का आस्वादन करते हैं. सोम से धन की अभिलाषा करने वाले स्तोता जिस प्रकार शब्द करते हैं, उसी प्रकार सोम का स्वाद लेने वाले देव उनकी धारा के समीप शब्द करते हैं. कुशल ऋत्विज्‌ दस उंगलियों के द्वारा सोम को मसलते हैं एवं जल के साथ सोम का रस मिलाते हैं. (५७)

EN English Translation

The great and non-violent god worships Som. Just as the stotas who desire wealth from Som do words, so do the gods who taste Soma say words near their stream. Kushal Ritwijs massages the som with ten fingers and mixes the juice of som with water. (57)

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