Samaveda Quick Jump
Navigate to any Chapter / Prapathak or Mantra
15.6.2
प्रोथदश्वो न यवसेऽविष्यन्यदा महः संवरणाद्व्यस्थात् । आदस्य वातो अनु वाति शोचिरध स्म ते व्रजनं कृष्णमस्ति ॥ (२)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
सामवेद मन्त्र 15.6.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
घोड़े जैसे घास चर जाते हैं, उसी तरह अग्नि (दावाग्नि) वृक्षों को चट कर जाते हैं. वे हवा के मार्ग का अनुकरण करते हैं. उन का मार्ग पवित्र और काले धुएं वाला है. (२)
EN English Translation
Just as horses graze grass, agni (dawaagni) devours trees. They simulate the path of the wind. Their path is holy and black smoke. (2)