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सामवेद

Chapter / Prapathak 2 • Dashati / Sukta 10 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 2 • दशती / सूक्त 10 • मन्त्र 5

2.10.5

Mantra ID: 2.10.5

श्रुतं वो वृत्रहन्तमं प्र शर्धं चर्षणीनाम् । आशिषे राधसे महे ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 2.10.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वृत्रासुर को मारने वाले बल की महिमा सब ने सुनी है. मनुष्य को अच्छा धन प्राप्त कराने की इच्छा से वह बल आप को देता हूं. (५)

EN English Translation

Everyone has heard the glory of the force that killed Vritrasura. I give that strength to you with the desire to get good money to man. (5)

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