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सामवेद

Chapter / Prapathak 2 • Dashati / Sukta 7 • Mantra 8

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 2 • दशती / सूक्त 7 • मन्त्र 8

2.7.8

Mantra ID: 2.7.8

ओजस्तदस्य तित्विष उभे यत्समवर्तयत् । इन्द्रश्चर्मेव रोदसी ॥ (८)

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सामवेद मन्त्र 2.7.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप का बल प्रकट होने लगा है. आप स्वर्गलोक और पृथ्वी को चमड़े के समान फैला रहे हैं. (८)

EN English Translation

O Indra! Your force is beginning to appear. You are spreading paradise and earth like leather. (8)

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