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Katha Upanishad (Kathopanishad) 3.11
महतः परमव्यक्तमव्यक्तात्पुरुषः परः । पुरुषान्न परं किञ्चित्सा काष्ठा सा परा गतिः॥ ११॥
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उपनिषद मन्त्र संख्या 11 का आध्यात्मिक रहस्य