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केनोपनिषद् • खण्ड 1, मन्त्र 5

Kena Upanishad • सामवेद (Samaveda - Talavakara Brahmana)

केनोपनिषद् • खण्ड 1 • मन्त्र 5

Kena Upanishad 1.5

Mantra: 1.5 [Kenopanishad_1.5]

यन्मनसा न मनुते येनाहुर्मनो मतम् । तदेव ब्रह्म त्वं विद्धि नेदं यदिदमुपासते ॥ ५॥

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HinduText AI से इस उपनिषद मन्त्र का ब्रह्मज्ञान समझें

उपनिषद मन्त्र संख्या 5 का आध्यात्मिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो ब्रह्म मन से मनन नहीं करता, और न जिसको मन से जाना जा सकता है किन्तु जिसकी शक्ति से मन मनन (संकल्प-विकल्प) करता है। तुम उसी को ब्रह्म समझो। जो समझते हैं कि मन की कल्पना से हमने उस ब्रह्म पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर लिया सो वह ब्रह्म नहीं है क्योंकि परिमित मन-अपरिमित, और अनन्त गुणों वाले ब्रह्म का ज्ञान कैसे प्राप्त कर सकता है। ॥५॥
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