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केनोपनिषद् • खण्ड 3, मन्त्र 10

Kena Upanishad • सामवेद (Samaveda - Talavakara Brahmana)

केनोपनिषद् • खण्ड 3 • मन्त्र 10

Kena Upanishad 3.10

Mantra: 3.10 [Kenopanishad_3.10]

तस्मै तृणं निदधावेतदादस्वेति तदुपप्रेयाय सर्वजवेन तन्न शशाकादातुं स तत एव निववृते नैतदशकं विज्ञातुं यदेतद्यक्षमिति ॥ १०॥

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उपनिषद मन्त्र संख्या 10 का आध्यात्मिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यक्ष ने उनके आगे वही एक तिनका रखा, और कहा इसको उड़ा कर दिखाओ। वायुदेव अपने पूरे वेग से उसके तिनके के पास पहुंचे, परन्तु उस तिनके को उड़ा नहीं सके। तब वह वहीं से लौट पड़े और देवताओं से बोले कि - मैं इसको नहीं जान सका जो यह यक्ष है। ॥१०॥
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