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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 140 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 140 • ऋचा / मन्त्र 6

1.140.6

Mantra ID: 1.140.6

भूष॒न्न योऽधि॑ ब॒भ्रूषु॒ नम्न॑ते॒ वृषे॑व॒ पत्नी॑र॒भ्ये॑ति॒ रोरु॑वत् । ओ॒जा॒यमा॑नस्त॒न्व॑श्च शुम्भते भी॒मो न श‍ृङ्गा॑ दविधाव दु॒र्गृभिः॑ ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.140.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अग्नि पीले रंग की लकड़ियों को अलंकृत करते हुए उन में प्रवेश करते हैं. जिस तरह बैल गायों की ओर दौड़ता है, उसी प्रकार अग्नि महान्‌ शब्द करते हुए उन लकड़ियों की ओर चारों तरफ से जाते हैं. वे बलप्रर्दशन सा करते हुए अपनी ज्वालाएं दीप्त करते हैं. जिस प्रकार न तु पकडा जा सकने वाला भयंकर पशु सींग घुमाता है, उसी प्रकार अग्नि ज्वालाओं को चलाते हैं. (६)

EN English Translation

Fire enters them by decorating yellow wood. Just as the bull runs towards the cows, in the same way, the agni goes from all sides towards those woods, saying great words. They light their flames while doing balpradshan. Just as a fierce animal that cannot be caught turns horns, so agnis drive flames. (6)

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