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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 182 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 182 • ऋचा / मन्त्र 6

1.182.6

Mantra ID: 1.182.6

अव॑विद्धं तौ॒ग्र्यम॒प्स्व१॒॑न्तर॑नारम्भ॒णे तम॑सि॒ प्रवि॑द्धम् । चत॑स्रो॒ नावो॒ जठ॑लस्य॒ जुष्टा॒ उद॒श्विभ्या॑मिषि॒ताः पा॑रयन्ति ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.182.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

तुग्र का पुत्र भुज्यु शत्रु द्वारा नीचे को मुंह करके पानी में गिराया गया था, इसलिए अंधकार में बहुत दुःखी था. सागर में उसे चार नावें मिलीं जो अश्विनीकुमारों ने भेजी थीं. (६)

EN English Translation

Bhujyu, the son of Tugra, was dropped into the water by the enemy, so he was very sad in the darkness. In sagar, he found four boats which were sent by the Ashwinikumars. (6)

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