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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 25 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 25 • ऋचा / मन्त्र 4

1.25.4

Mantra ID: 1.25.4

परा॒ हि मे॒ विम॑न्यवः॒ पत॑न्ति॒ वस्य॑‍इष्टये । वयो॒ न व॑स॒तीरुप॑ ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.25.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस प्रकार चिड़ियां अपने घोंसलों की ओर तेजी से उड़ती हैं, उसी प्रकार हमारी क्रोधरहित विचारधाराएं जीवन प्राप्त करने के लिए दौड़ रही हैं. (४)

EN English Translation

Just as birds fly fast towards their nests, so our angerless ideologies are racing to get to life. (4)

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