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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 25 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 25 • ऋचा / मन्त्र 6

1.25.6

Mantra ID: 1.25.6

तदित्स॑मा॒नमा॑शाते॒ वेन॑न्ता॒ न प्र यु॑च्छतः । धृ॒तव्र॑ताय दा॒शुषे॑ ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.25.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मित्र और वरुण हव्य देने वाले यजमान पर प्रसन्न होकर हमारे द्वारा दिया हुआ साधारण हवि स्वीकार कर लेते हैं. वे कभी भी उसका त्याग नहीं करते. (६)

EN English Translation

Friends and Varuns are pleased with the host who gives the havan and accept the simple gift given by us. They never abandon him. (6)

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