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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 61 • Mantra / Rik 13

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 61 • ऋचा / मन्त्र 13

1.61.13

Mantra ID: 1.61.13

अ॒स्येदु॒ प्र ब्रू॑हि पू॒र्व्याणि॑ तु॒रस्य॒ कर्मा॑णि॒ नव्य॑ उ॒क्थैः । यु॒धे यदि॑ष्णा॒न आयु॑धान्यृघा॒यमा॑णो निरि॒णाति॒ शत्रू॑न् ॥ (१३)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.61.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्तोता! स्तुति के योग्य एवं युद्ध के लिए शीघ्रता करने वाले इंद्र के पूर्व कर्मो की प्रशंसा करो. इंद्र युद्ध में शत्रुघात के निमित्त आयुधों को बार-बार फेंकते हुए उनके सामने जाते हैं. (१३)

EN English Translation

This is the hymn! Praise indra's former deeds worthy of praise and hastening for war. Indra goes in front of them repeatedly throwing weapons for the sake of enemy attack in battle. (13)

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