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10.101.2
म॒न्द्रा कृ॑णुध्वं॒ धिय॒ आ त॑नुध्वं॒ नाव॑मरित्र॒पर॑णीं कृणुध्वम् । इष्कृ॑णुध्व॒मायु॒धारं॑ कृणुध्वं॒ प्राञ्चं॑ य॒ज्ञं प्र ण॑यता सखायः ॥ (२)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.101.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे मित्र स्तोताओ! तुम मादक स्तुतियां करो, कृषि आदि कमों का विस्तार करो, डांड के द्वारा पार लगाने वाली नाव बनाओ, हल एवं जुए आदि उपकरणों को सजाओ तथा यज्ञपात्र अग्नि को भली प्रकार लाओ. (२)
EN English Translation
This friend, Stotao! You do intoxicating praises, expand the fields of agriculture, etc., make a boat crossing through the danda, decorate the tools like ploughs and gambling, etc., and bring the yajnapatra agni well. (2)