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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 30 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 30 • ऋचा / मन्त्र 5

10.30.5

Mantra ID: 10.30.5

याभिः॒ सोमो॒ मोद॑ते॒ हर्ष॑ते च कल्या॒णीभि॑र्युव॒तिभि॒र्न मर्यः॑ । ता अ॑ध्वर्यो अ॒पो अच्छा॒ परे॑हि॒ यदा॑सि॒ञ्चा ओष॑धीभिः पुनीतात् ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.30.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अध्वर्युजनो! जिस प्रकार सुंदरी युवतियों से मिलकर पुरुष हर्षित और प्रसन्न होते हैं, उसी प्रकार जिन जलों से मिलकर सोम मुदित होते हैं, उन्हीं जलों को लाने के लिए जाओ. लाए हुए जलों से सोम को धोओ और सोम के साथ-साथ दशापवित्र को शुद्ध करो. (५)

EN English Translation

O adhwaryujano! Just as men are joyful and happy to meet beautiful young women, so go to fetch the same waters with which the soma mudit comes from. Wash the som with the brought waters and purify the dashapavitra along with the mon. (5)

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