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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 30 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 30 • ऋचा / मन्त्र 7

10.30.7

Mantra ID: 10.30.7

यो वो॑ वृ॒ताभ्यो॒ अकृ॑णोदु लो॒कं यो वो॑ म॒ह्या अ॒भिश॑स्ते॒रमु॑ञ्चत् । तस्मा॒ इन्द्रा॑य॒ मधु॑मन्तमू॒र्मिं दे॑व॒माद॑नं॒ प्र हि॑णोतनापः ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.30.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे जलो! जिस इंद्र ने तुम्हारे मेघ द्वारा घिरे होने पर निकलने के लिए मार्ग बनाया एवं जिसने तुम्हें मेघ की कठिन पकड़ से छुड़ाया, उसी इंद्र के लिए मधुरतापूर्ण तथा देवों को प्रमुदित करने वाली अपनी लहर भेजो. (७)

EN English Translation

O burn! Send your wave of sweetness and pleasing to the gods to the same Indra who made the way out when you are surrounded by the cloud and who rescued you from the difficult grip of the cloud. (7)

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