Popular:
ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 59 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 59 • ऋचा / मन्त्र 8

10.59.8

Mantra ID: 10.59.8

शं रोद॑सी सु॒बन्ध॑वे य॒ह्वी ऋ॒तस्य॑ मा॒तरा॑ । भर॑ता॒मप॒ यद्रपो॒ द्यौः पृ॑थिवि क्ष॒मा रपो॒ मो षु ते॒ किं च॒नाम॑मत् ॥ (८)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 10.59.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

महान्‌ द्यावा-पृथिवी सुबंधु का कल्याण करें. उदक का निर्माण करने वाली द्यावा- पृथिवी पाप को दूर करें. हे सुबंधु! द्यावा-पृथिवी के होते हुए कोई भी पाप तुम्हारी हिंसा न कर सकें. (८)

EN English Translation

Do good to The Mahandyava-Prithvi Subandhu. Remove the divine sin of the earth- which creates the udak. O brother! No sin can do you violence while you are in the midst of the earth. (8)

卐 HinduText AI