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2.20.7
स वृ॑त्र॒हेन्द्रः॑ कृ॒ष्णयो॑नीः पुरंद॒रो दासी॑रैरय॒द्वि । अज॑नय॒न्मन॑वे॒ क्षाम॒पश्च॑ स॒त्रा शंसं॒ यज॑मानस्य तूतोत् ॥ (७)
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ऋग्वेद मन्त्र 2.20.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
वृत्रहंता एवं पुरंदर इंद्र ने नीच जाति वाले दासों की सेना को नक्ट किया था. मनु के लिए धरती और जल की रचना करने वाले इंद्र यजमान की महती अभिलाषा को पूर्ण करें. (७)
EN English Translation
Vrithrahanta and Purandar Indra had nudged the army of lower jati dasas. Fulfill the great desire of Indra, the host of Indra, who created the earth and water for Manu. (7)