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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 24 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 24 • ऋचा / मन्त्र 4

2.24.4

Mantra ID: 2.24.4

अश्मा॑स्यमव॒तं ब्रह्म॑ण॒स्पति॒र्मधु॑धारम॒भि यमोज॒सातृ॑णत् । तमे॒व विश्वे॑ पपिरे स्व॒र्दृशो॑ ब॒हु सा॒कं सि॑सिचु॒रुत्स॑मु॒द्रिण॑म् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.24.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बृहस्पति ने पत्थर के समान दृढ़ मुख वाले एवं झुके हुए मेघ को शक्ति द्वारा नष्ट किया. सूर्य किरणों ने उसका जल पिआ. उन्होंने बादल के साथ ही वर्षा द्वारा अधिक मात्रा में सिंचन किया. (४)

EN English Translation

Jupiter destroyed the cloud with a firm face and bowed like a stone by power. The sun's rays drank his water. They irrigated more quantities by cloud as well as rain. (4)

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