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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 27 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 27 • ऋचा / मन्त्र 14

2.27.14

Mantra ID: 2.27.14

अदि॑ते॒ मित्र॒ वरु॑णो॒त मृ॑ळ॒ यद्वो॑ व॒यं च॑कृ॒मा कच्चि॒दागः॑ । उ॒र्व॑श्या॒मभ॑यं॒ ज्योति॑रिन्द्र॒ मा नो॑ दी॒र्घा अ॒भि न॑श॒न्तमि॑स्राः ॥ (१४)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.27.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अदिति, मित्र एवं वरुण! यदि हम तुम्हारे प्रति कोई अपराध करें तो उससे हमारी रक्षा करना. हे इंद्र! हम विस्तृत एवं भयरहित ज्योति प्राप्त करें. अंधेरी रात हमें व्याप्त न करे. (१४)

EN English Translation

Hey Aditi, friend and Varun! If we commit any crime against you, protect us from it. O Indra! Let us get a wide and fearless light. May the dark night not pervad us. (14)

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