Rigveda Quick Jump
Navigate to any Mandal or Mantra / Rik
2.35.4
तमस्मे॑रा युव॒तयो॒ युवा॑नं मर्मृ॒ज्यमा॑नाः॒ परि॑ य॒न्त्यापः॑ । स शु॒क्रेभिः॒ शिक्व॑भी रे॒वद॒स्मे दी॒दाया॑नि॒ध्मो घृ॒तनि॑र्णिग॒प्सु ॥ (४)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 2.35.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जल दर्पहीन युवती के समान है. वह युवा के समान अपांनपात् को अत्यधिक अलंकृत करके चारों ओर से घेरता है. ईधनरहित एवं दीप्तरूप वे अपांनपात् धनरहित अन्न की उत्पत्ति के लिए निर्मल तेज जल के बीच प्रकाशित होते हैं. (४)
EN English Translation
Water is similar to the poor young woman. He surrounds the youthlike apanpanpata by being highly ornate. They are illuminated in the midst of pure bright water for the production of non-rich food. (4)