Popular:
ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 18 • Mantra / Rik 13

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 18 • ऋचा / मन्त्र 13

4.18.13

Mantra ID: 4.18.13

अव॑र्त्या॒ शुन॑ आ॒न्त्राणि॑ पेचे॒ न दे॒वेषु॑ विविदे मर्डि॒तार॑म् । अप॑श्यं जा॒यामम॑हीयमाना॒मधा॑ मे श्ये॒नो मध्वा ज॑भार ॥ (१३)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 4.18.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हमने खाने योग्य वस्तुओं के न होने पर कुत्ते की आंतों को पकाया था. उस समय कोई देव हमारी रक्षा करने वाला नहीं मिला. हम अपनी पत्नी को अपमानित होता देखते रहे. हमें केवल इंद्र ने ही आनंदित किया. (१३)

EN English Translation

We cooked the dog's intestines when there were no eatables. At that time there was no God to protect us. We watched our wife humiliated. Only Indra made us happy. (13)

卐 HinduText AI