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4.18.3
प॒रा॒य॒तीं मा॒तर॒मन्व॑चष्ट॒ न नानु॑ गा॒न्यनु॒ नू ग॑मानि । त्वष्टु॑र्गृ॒हे अ॑पिब॒त्सोम॒मिन्द्रः॑ शतध॒न्यं॑ च॒म्वोः॑ सु॒तस्य॑ ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 4.18.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
इंद्र बोले-“यदि हम पुरातन योनि-मार्ग से नहीं निकलेंगे तो हमारी माता मर जाएगी. इस प्रकार हम शीघ्र बाहर निकलेंगे. वामदेव कहने लगे-“इंद्र ने त्वष्टा के घर में पत्थरों द्वारा निचोड़े गए एवं सैकड़ों रत्नों के मूल्य वाले सोमरस को पिया.” (३)
EN English Translation
Indra said, "If we do not go out of the vagina, which is the tradition, our mother will die." That's how we'll get out soon. Vamdev began to say, "Indra drank the somras in the house of Tvashta, which was squeezed by stones and worth hundreds of ratnas." (3)