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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 18 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 18 • ऋचा / मन्त्र 6

4.18.6

Mantra ID: 4.18.6

ए॒ता अ॑र्षन्त्यलला॒भव॑न्तीरृ॒ताव॑रीरिव सं॒क्रोश॑मानाः । ए॒ता वि पृ॑च्छ॒ किमि॒दं भ॑नन्ति॒ कमापो॒ अद्रिं॑ परि॒धिं रु॑जन्ति ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.18.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पानी से भरी हुई नदियां इस प्रकार गर्जन करती हुई बह रही हैं, जैसे इंद्र की महत्ता का घोष कर रही हैं. उनसे पूछो कि ये क्या कहती हैं? इंद्र ने जल को रोकने वाले मेघ को भेदा था. क्या वे नदियां उसी का वर्णन कर रही हैं? (६)

EN English Translation

The rivers filled with water are flowing roaring like they are proclaiming the importance of Indra. Ask them what they say? Indra had pierced the cloud that stopped the water. Are those rivers describing the same? (6)

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