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6.44.23
अ॒यम॑कृणोदु॒षसः॑ सु॒पत्नी॑र॒यं सूर्ये॑ अदधा॒ज्ज्योति॑र॒न्तः । अ॒यं त्रि॒धातु॑ दि॒वि रो॑च॒नेषु॑ त्रि॒तेषु॑ विन्दद॒मृतं॒ निगू॑ळ्हम् ॥ (२३)
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ऋग्वेद मन्त्र 6.44.23 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
इसी सोमरस ने उषाओं के शोभनपालक सूर्य को सुशोभित किया था एवं सूर्य मंडल के बीच में ज्योति की स्थापना की थी. तीनों सवनों में तीन प्रकार से वर्तमान इसी सोमरस ने तेजस्वी तीनों लोकों के बीच छिपे हुए अमृत को पाया था. (२३)
EN English Translation
It was this Somras that adorned the sun, the adornment of the Ushas, and established the light in the middle of the sun circle. In all the three sawans, in three ways, the present same Somras had found the elixir hidden among the three lokas. (23)