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6.46.3
यः स॑त्रा॒हा विच॑र्षणि॒रिन्द्रं॒ तं हू॑महे व॒यम् । सह॑स्रमुष्क॒ तुवि॑नृम्ण॒ सत्प॑ते॒ भवा॑ स॒मत्सु॑ नो वृ॒धे ॥ (३)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 6.46.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जो इंद्र प्रबल शत्रुओं को मारने वाले एवं सबको देखने वाले हैं, उन्हें हम बुलाते हैं. हे हजार रूपों (लिंगों) वाले, बहुधनसंपन्न एवं सज्जन पालक इंद्र! युद्धों में तुम हमें समृद्ध बनाओ. (३)
EN English Translation
We call Indra, who kills strong enemies and sees everyone. O Indra, the multi-rich and gentle guardian of a thousand forms (lingas)! In wars you make us prosperous. (3)