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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 18 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 18 • ऋचा / मन्त्र 10

7.18.10

Mantra ID: 7.18.10

ई॒युर्गावो॒ न यव॑सा॒दगो॑पा यथाकृ॒तम॒भि मि॒त्रं चि॒तासः॑ । पृश्नि॑गावः॒ पृश्नि॑निप्रेषितासः श्रु॒ष्टिं च॑क्रुर्नि॒युतो॒ रन्त॑यश्च ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.18.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस प्रकार बिना ग्वाले की गाएं जौ के खेत की ओर जाती हैं, उसी प्रकार पृश्चि माता द्वारा भेजे गए एवं परस्पर सम्मिलित मरुदगण पूर्व निश्चय के अनुसार अपने मित्र इंद्र की ओर गए थे. मरुतों क्रे घोड़े भी प्रसन्न होकर इंद्र की ओर गए. (१०)

EN English Translation

Just as the cows without gwale go towards the barley field, so the deserts sent and interlinked by the mother of the earth went to their friend Indra according to the previous determination. Maruton Cray horses also went to Indra with delight. (10)

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