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7.18.16
अ॒र्धं वी॒रस्य॑ शृत॒पाम॑नि॒न्द्रं परा॒ शर्ध॑न्तं नुनुदे अ॒भि क्षाम् । इन्द्रो॑ म॒न्युं म॑न्यु॒म्यो॑ मिमाय भे॒जे प॒थो व॑र्त॒निं पत्य॑मानः ॥ (१६)
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ऋग्वेद मन्त्र 7.18.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
इंद्र ने ऐसे लोगों को मारकर धरती पर गिरा दिया था जो शक्तिशाली सुदास के हिंसक थे, इंद्र को नहीं मानते थे, हव्य के पालक और उत्साही थे. इंद्र ने क्रोधियों का क्रोध समाप्त कर दिया. सुदास का शत्रु पलायन के मार्ग पर चला गया. (१६)
EN English Translation
Indra had killed and cast down on earth people who were violent with the mighty Sudas, did not believe in Indra, were the guardians and enthusiasts of Havya. Indra ended the anger of the anger. Sudas' enemy went on the path of escape. (16)