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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 25 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 25 • ऋचा / मन्त्र 2

7.25.2

Mantra ID: 7.25.2

नि दु॒र्ग इ॑न्द्र श्नथिह्य॒मित्रा॑ँ अ॒भि ये नो॒ मर्ता॑सो अ॒मन्ति॑ । आ॒रे तं शंसं॑ कृणुहि निनि॒त्सोरा नो॑ भर स॒म्भर॑णं॒ वसू॑नाम् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.25.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! युद्ध में जो लोग हमारे सामने आकर हमें पराजित करते हैं, उन शत्रुओं का नाश करो. हमारी निंदा के इच्छुक व्यक्ति का नाम मिटा दो. हमें धन का समूह दो. (२)

EN English Translation

O Indra! Destroy those who come before us in war and defeat us. Erase the name of the person wishing to condemn us. Give us the group of funds. (2)

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