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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 25 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 25 • ऋचा / मन्त्र 3

7.25.3

Mantra ID: 7.25.3

श॒तं ते॑ शिप्रिन्नू॒तयः॑ सु॒दासे॑ स॒हस्रं॒ शंसा॑ उ॒त रा॒तिर॑स्तु । ज॒हि वध॑र्व॒नुषो॒ मर्त्य॑स्या॒स्मे द्यु॒म्नमधि॒ रत्नं॑ च धेहि ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.25.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे साफा वाले इंद्र! तुम्हारे सैकड़ों रक्षासाधन एवं हजारों कामनाएं एवं धन मुझ सुदास के हों. हिंसक मनुष्य के आयुध का तुम नाश करो एवं हमारे लिए दीप्तिशाली यश एवं रत्न दो. (३)

EN English Translation

O Indra of Safa! May your hundreds of defenses and thousands of wishes and wealth belong to me. You must destroy the weapon of a violent man and give us glorious glory and gems. (3)

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