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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 17 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 17 • ऋचा / मन्त्र 5

8.17.5

Mantra ID: 8.17.5

आ ते॑ सिञ्चामि कु॒क्ष्योरनु॒ गात्रा॒ वि धा॑वतु । गृ॒भा॒य जि॒ह्वया॒ मधु॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.17.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम्हारी दोनों कोखों को मैं सोमरस से पूर्ण करता हूं. सोमरस तुम्हारे शरीर के सभी भोगों को व्याप्त करे. तुम जीभ द्वारा मधुर सोमरस स्वीकार करो. (५)

EN English Translation

O Indra! I complete both your wombs with somras. May the somras permeate all the indulgences of your body. You accept the sweet somras by tongue. (5)

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