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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 2 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 2 • ऋचा / मन्त्र 8

8.2.8

Mantra ID: 8.2.8

त्रयः॒ कोशा॑सः श्चोतन्ति ति॒स्रश्च॒म्व१॒ः॑ सुपू॑र्णाः । स॒मा॒ने अधि॒ भार्म॑न् ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.2.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

एक ही यज्ञ में तीन प्रकार के कलश सोमरस को धारण करते हैं एवं तीनों चमस भी सोने से पूर्ण हैं. (८)

EN English Translation

In the same yagna, three types of kalash hold the somras and all the three spoons are also full of gold. (8)

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