Popular:
ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 23 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 23 • ऋचा / मन्त्र 5

8.23.5

Mantra ID: 8.23.5

उदु॑ तिष्ठ स्वध्वर॒ स्तवा॑नो दे॒व्या कृ॒पा । अ॒भि॒ख्या भा॒सा बृ॑ह॒ता शु॑शु॒क्वनिः॑ ॥ (५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 8.23.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शोभन यज्ञस्तुति किए जाते हुए, चारों ओर जाती हुई प्रसिद्ध दीप्ति से युक्त एवं ज्वलनशील अग्नि! तुम तेजस्वी ज्वालाओं के साथ बैठो. (५)

EN English Translation

O Shobhan Yajnasuti being performed, the famous and inflammable agni with the famous glow going around! You sit with stunning flames. (5)

卐 HinduText AI