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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 24 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 24 • ऋचा / मन्त्र 5

8.24.5

Mantra ID: 8.24.5

न ते॑ स॒व्यं न दक्षि॑णं॒ हस्तं॑ वरन्त आ॒मुरः॑ । न प॑रि॒बाधो॑ हरिवो॒ गवि॑ष्टिषु ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.24.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे हरि नामक घोड़ों वाले इंद्र! गायों को खोजते समय विरोधी पक्ष के योद्धा न तुम्हारा बायां हाथ हटा सकते हैं और न दायां. संग्राम में बाधा पहुंचाने वाले असुर भी यह नहीं कर सकते. (५)

EN English Translation

O Indra with horses called Hari! When searching for cows, the warriors of the opposing side can neither remove your left hand nor the right hand. Even the asuras who obstruct the struggle cannot do this. (5)

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