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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 25 • Mantra / Rik 16

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 25 • ऋचा / मन्त्र 16

8.25.16

Mantra ID: 8.25.16

अ॒यमेक॑ इ॒त्था पु॒रूरु च॑ष्टे॒ वि वि॒श्पतिः॑ । तस्य॑ व्र॒तान्यनु॑ वश्चरामसि ॥ (१६)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.25.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मनुष्यों का पालन करने वाले ये मित्र अकेले ही बहुत से प्रधान द्रव्यों को अपने तेज से इस प्रकार देखते हैं. हम तुम्हारे कल्याण के लिए मित्र के व्रतों का आचरण करते हैं. (१६)

EN English Translation

These friends who follow humans alone see many of the principal substances in this way with their brightness. We conduct the fasts of a friend for your welfare. (16)

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