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8.25.7
अधि॒ या बृ॑ह॒तो दि॒वो॒३॒॑ऽभि यू॒थेव॒ पश्य॑तः । ऋ॒तावा॑ना स॒म्राजा॒ नम॑से हि॒ता ॥ (७)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.25.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे सत्ययुक्त, भली प्रकार सुशोभित एवं हव्य को प्रेम करने वाले मित्र व वरुण! तुम देवों को प्रसन्न करने के लिए इस प्रकार देखते हो, जिस प्रकार बैल गायों के झुंड को देखता है. (७)
EN English Translation
O true, well-groomed and loving friend and Varuna! You look at the gods to please them in this way, just as the bull sees the flock of cows. (7)