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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 35 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 35 • ऋचा / मन्त्र 2

8.35.2

Mantra ID: 8.35.2

विश्वा॑भिर्धी॒भिर्भुव॑नेन वाजिना दि॒वा पृ॑थि॒व्याद्रि॑भिः सचा॒भुवा॑ । स॒जोष॑सा उ॒षसा॒ सूर्ये॑ण च॒ सोमं॑ पिबतमश्विना ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.35.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शक्तिशाली अश्विनीकुमारो! तुम समस्त बुद्धियों, सब प्राणियों, द्युलोक, पृथ्वी, पर्वतों, उषा तथा सूर्य के साथ मिलकर सोमरस पिओ. (२)

EN English Translation

O mighty Ashwinikumaro! You drink somras together with all the intellects, all beings, doloka, earth, mountains, usha and sun. (2)

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