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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 43 • Mantra / Rik 33

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 43 • ऋचा / मन्त्र 33

8.43.33

Mantra ID: 8.43.33

तत्ते॑ सहस्व ईमहे दा॒त्रं यन्नोप॒दस्य॑ति । त्वद॑ग्ने॒ वार्यं॒ वसु॑ ॥ (३३)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.43.33 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शक्तिशाली अग्नि! तुम्हारा जो वरण एवं दान योग्य धन क्षीण नहीं होता, हम उसी की याचना करते हैं. (३३)

EN English Translation

O mighty agni! We ask for the same that your choice and charitable wealth is not lost. (33)

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