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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 43 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 43 • ऋचा / मन्त्र 5

8.43.5

Mantra ID: 8.43.5

ए॒ते त्ये वृथ॑ग॒ग्नय॑ इ॒द्धासः॒ सम॑दृक्षत । उ॒षसा॑मिव के॒तवः॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.43.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अलग-अलग प्रज्वलित ये अग्नियां उषाओं के ध्वजों के समान दिखाई देती हैं. (५)

EN English Translation

These different ignited agnis look like the flags of the Ushas. (5)

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